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स्वगोत्र :खाप पंचायत : विवाह

स्वगोत्र :खाप  पंचायत : विवाह विवाद भागवत पुराण के अनुसार ब्रह्मा के बाएँ अंग से महिला की उत्पत्ति हुई और दायिने अंग से पुरुष की उतपत्ति हुई अर्थात स्त्री और पुरुष एक ही शारीर के दो अभिन्न अंग है जिनके कारण सृष्टि का सृजन हुआ और चलता आ रहा है जहाँ तक गोत्र का निर्धारण है हिन्दू समाज में उसकी दो प्रकार से व्यवस्था है पहली पिता के द्वारा दूसरी गुरु के द्वारा/पति के द्वारा .इसके साथ साथ  किसी भी महिला को अपने जीवन साथी चुनने की गुण,वंश और बल के आधार परदी गयी है. जिस से प्रभावित हो कर कोई स्त्री अपने जीवन की रक्षा एवं व्यवस्था का भार किसी पुरुष को सोंपती है या उसके माता पिता कन्यादान के माध्यम से करते हैं इसके बाद कन्या का नाम गोत्र व जाति पति की सुविधा अनुसार हो होती है. हिन्दू समाज में कुछ लोग क्षत्र वाद को मान्यता देते हैं ,कुछ वंश वाद को देते हैं कुछ गोत्र वाद को देते हैं अर्थात अपनी नानी मामी आदि के गोत्र में विवाह करना वर्जित मानते हैं,कुछ लोग एक ही गोत्र में विवाह को ठीक मानते हैं लेकिन क्षेत्रीय अन्तेर को अनिवार्य मानते हैं एवं कुछ दुसरे लोग बुआ,विवाहित बहन के गोत्र ...

कंहा लगाय कोन सा पौधा घर के अंदर

  वृक्ष  इस  धरा का  आभूषण  है | वृक्ष  धरा  का  देवता  है |  सभी  विकारोको  अपने  उपर  ग्रहण  कर  मानब  जीवन  में  सुख  तथा  सन्ति  देने  बाला  वृक्ष  ही  मना गया  है | महाभारत  काव्य  के  राचीय्ता  वेद  व्यास  जी  ने  अपने  महाभारत  पुराणमें  लिखा  है किवृक्ष  श्राष्टी के  अलंकार  है  तथा  मानब जीवन  के  देवता  भी  है | वृक्ष  कटना  महा  पाप  है  तथा  वृक्ष  रोपण  महा  पुण्य  है इतना  ही  नही  वेद  व्यास जी ने  महा भारत  में  लिखा  कि वृक्ष  रोपण पुत्र  के  समान  सुभ  फळ  दायी  है  जीन  के जीवन  में  संतान  नही  है  ऐसे  दाम्पत्ती  वृक्ष  रोपण  कर  के  पु...

ग्रह दशा :३१ अक्टूबर १९८४:१८से १९ मई २०१०

ग्रह दशा :३१ अक्टूबर १९८४:१८से १९ मई २०१० ३१  अक्टूबर १९८४ की ग्रेह स्थति  पर ज्योतिषिये आधार पर अगर विवेचन करें तो ग्रहों की स्थिति कुछ इस प्रकार की बनती है जो मानव जीवन को अत्यंत प्रभावित  करने वाली तथा देश के लिए दुर्भागयापुरण सिद्ध हुई .उस समय की ग्रह स्थिति जिसका आंकलन स्वतंत्र भारत की कुंडली में किया जाये तो देश के लिए कमजोर और भयानक परिस्थिति थी जिसका आरम्भ किसी राजनेता के भाषण या धर्म आधार को माना जाये.,तो ज्योतिषीय स्थिति स्पष्ट हो जाती है.स्वतंत्र भारत की कुंडली वृषलगन और कर्क राशी की है जिसका नवांश मीन राशी से बनता है. उस समय कुंडली में सूर्य में केतु का अंतर चल रहा था.केतु भारत की कुंडली में सप्तम घर ,मारक स्थान में है ३१ अक्टोबर वाले दिन कानून का  कारक गुरु मंगल के साथ १२ वें घर वानप्रस्थ अवस्था में था. फलस्वरूप जो घटना घटित हुई उस पर कानून और सेना ने नियंत्रण हेतु कोई कार्य नहीं किया घटना स्थलों से सेनाओं की दुरिएअन  होने   के कारण घटना घटित होती रही . इस घटना का एक दूसरा ज्योतिषीय कारण शक्तिशाली सूर्य जो सरकार वा सत्ता का   का...

वास्तू में पेरामिड का रेहास्य

वास्तू बसने की एक एसी कला है जिस के द्वारा मानब का चाहु मुखी विकाश संभब है वैसे वास्तू के दोसो को दूर करने के अनेक उपाय वास्तू बिदोने कहे है जिस में एक पिरामिड है पिरामिड अकरती में उर्जा एकर्तीत करने की एक अनोखी शक्ती है जो अपनी सकारात्मक उर्जा के द्वारा नकारात्मक उर्जा को दूर करता है इसी लिये प्राचीन काळ से ही वास्तू में पिरामिड का विशेष महत्य रहा है वैसे पिरामिड का जन्म मिस्र की शाभ्य्ता में सबसे पहले कहा गया है लेकीन इस का मतलब ये नही की भारतीय सभ्यता में इसका कोई महत्य नही है भारत की धार्मिक इमारते की उपरी अकरती जिसे बोल चल की भाषा में गुमद कहा जाता है एक प्रकार का चातुस्य कोनीयपिरामिड ही है जो हमे अध्यात्मिक सुख तथा सन्ति प्रदान करने बाला होता है वेसे किसी भी धार्मिक स्थळ चाहे वह मंदिर हो या मस्जिद या फिर चर्च या गुरुद्वारा सभी की उपरी अकरती गुमद अकरती का एक पिरामिड है पिरामिड का महत्य वास्तू में सबसे अधिक है क्योकि पिरामिड अकर्तीको कही भी वास्तू दोष युक्त जगह पर लागनेसे वास्तू दोष दूर होता है लेकीन निर्भर करता है की पिरामिड की आक्र्ती सयाज आदि क्या हो वास्त...

भारत वर्ष के लिए प्राकृतिक आपदा मई २०१० में आ सकती है

भारत वर्ष के लिए प्राकृतिक आपदा मई २०१० में आ सकती है  २ मई   २०१० को मंगल अपनी राशी मिथुन को परवर्तित कर के कर्क में होगा तथा इसकी नवांश में स्थिति कुम्भ के नवांश में शनि एवं सूर्य के साथ होगी. मंगल का अपनी नीच राशी में आना तथा गुरु द्वारा दृष्टित ना होना भारत के हित में नहीं है क्यूँ की स्वतंत्र भारत की कुंडली में मंगल मार्ग स्थान का स्वामी है और मार्क भाव में बैठा हुआ है.इस कारण से अशुभता के और संकेत हैं. दूसरा कारण देश की चन्द्र कुंडली कर्क राशी से बनती है.जिस पर मंगल का गोचर है. कर्क राशी का स्वामी चंद्रमा जल का स्वामी है अतः २  मई २०१० को जब मंगल अपनी नीच राशी कर्क के साथ साथ कुम्भ के नवांश में शनि और सूर्य के साथ में गोचर करेगा और गुरु द्वारा दृष्ट नहीं होगा ऐसी स्थिति में देश के अंदर सैनिक एवं राजनैतिक समस्याएं उत्पन्न होने की संभावनाएं हैं. इसके साथ साथ जल से सम्बंधित प्राकृतिक आपदा जिसका सम्बन्ध भूमि से भी होगा उत्पन्न होगी और सरकार के लिए चिंता का विषय बनेगी. मंगल १३.५ से १९.५ तक कुम्भ के नवांश में ही रहेगा ऐसी स्थिति में बुद्धिजीवी वर्...

ज्योतिष करम बदीहै -भाग्य बादी नहीं

देव दुर्लभ मनाब देह  कर्म करने के लिए है  बसे हर प्राणी का कर्म पर पूरण अधिकार होना चाहिए  यह हमारे सद ग्रंथो तथा अबतार बादसभी  का निर्णय है  इस में कोई अतो सूक्ति नहीं  है  अतः एह स्पस्ट  है मनाब कर्म से महानबनता  है लेकिन कर्म ठीक तथा सही दिशा में हो  उस के लिए जोतिष्य मार्ग दर्शन कहा गया  है जोतिष को वेदों की चछु कहा गया  है . इसलिए सही गलत का निर्णय करना  जोतिष की प्राथमिकता है  .अतः जोतिष मार्ग दर्शन के लिए है .लेकिन  मार्ग दर्शन सही हो  उस के लिए गुरु का सही होना  अति अब्स्क  है आधुनिक समाज में बढ़ी बिडम्बना की बात यह की समाज सत्य से परेहट ता जा रहा है  समाज के अधिकतर लोग जो इश्वरी विधान को अपने अंकुल बना कर चलाना  चाहते  है . सत्य  से हट कर जीवन जी रहे है -जो बढ़ी बिडम्बना  तथा आश्चर्य  है  इसी प्रस्थिति में जोतिश्यी सही मार्ग दर्शन मिलना कठिन ही नहीं असमभाब भी है  जोतिष का निरंतर बढ़ता दूर प्रयोग चिंता का विषय है .वेशे तो हमारे देश में हर ...

मार्गी मंगल के प्रभाब

मंगल जोतिष में बल तथा सेना का कारक माना गया है ,इन दिन मंगल अपनी नीच राशी कर्कमें चल रहा है . जिस ने १०मर्च को मार्गी गति ली है ,देश की कुंडली में मंगल का अपना एक विशेष रोल है .मंगल देश की कुडली में योग कारक का रौल कर रहा है,लेकिन कर्कराशी में होने के कारण जल से सम्भित घटनाये जिन का रूप प्रकिर्तिक हो घटित होने की संभाबना है .अतः मंगल के कर्क राशी में गोचर होने के कारण सुनामी जैसी घटना घटित हो सकती है.इन दिनों मंगल जब शनि के बराबर अंशो में गोचर करेगा राजनैतिक घटनाये प्रभाबत हो सकती है 'अतः २४,२५,२६,२७,मार्च देश में राजनेतिक गत विधि पर बर्तित कर सकती है .इन दिनों कानून में प्रबतन तथा किसी राजनेता को लेकर कानून के प्रभाबित होने के पूरेसंकेत है .एह मंगल may मास में ८म नाबंश में जायेगा .जिस से केंद्र सरकार को भरी मुसीबतों का सामना करना पर सक्ता है मंगल के नीच राशी तथा ८ब नाबंश में होने के कारण अग्नि से भयतथा रेल यता यात पर बिपरीत प्रभाब परेगा अतः मंगल का नीच राशी ८ब नाबंश किसी भी प्रकार का राजनैतिक बदलाब कर सकती है इसी लिए एह अबस्क्य है बिजली सम्बन्धी उपकरणों के प्रयोग तथा किसानो को ख...