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सूर्य का मेष राशी में प्रवेश

सूर्य का  मेष  राशी  में  प्रवेश १३ अप्रेल २०१२ दिन शुक्रवार को सूर्य गुरु की राशी मीन को त्याग कर मंगल की राशी मेष में प्रवेश करेगा परिणाम स्वरुप उस समय गुरु एवं सूर्य गोचर वश मेष राशी में हो जायेंगे . इस के साथ साथ शुक्र का संचार वरिश राशी में होने के कारण सूर्य से आगे होगा एवं बुद्ध का संचार मीन राशी में होनें के कारण सूर्य से पीछे होगा .सूर्य का शुक्र के दिन मंगल की राशी मेष में प्रवेश करना इस बात का प्रतीक है की उत्तर के देशों में अशांति एवं युद्ध की परिस्थिति उत्त्पन्न   होगी  तथा जनता में भय व्याप्त होगा एवं पूर्व के देशों में सुख और समृद्धि बरकरार रहेगी . सूर्य सक्रांति के अनुसार इस मॉस में ५ शनिवार और ५ रविवार हैं मॉस में ५ शनिवार होनें के कारण प्राकृतिक  प्रकोप अग्नि भय भूकंप आदि की सम्भावना बढ जाएगी .५ रविवारों के कारण राजनैतिक संकट उपद्रव की घटनाएं बढेंगी ,समाज में सरकार की नीतियों की बड़े पैमानें पर आलोचना होगी जिस के चलते कहीं कहीं युद्ध के से वातावरण पैदा हो सकते हैं .सूर्य का वासु की नाडी में स्थित होनें के कारण तथा मंगल का अम्...

नव वर्ष का वर्षफल--2012-2013

नव  वर्ष  का  वर्षफल  हिन्दू नव वर्ष का शुभारम्भ दिनांक २३ मार्च २०१२ दिन शुक्रवार छात्र शुक्ल प्रतिपदा से होगा .इस नव वर्ष का नाम विश्ववासु संवत्सर  होगा।वर्ष का राजा शुक्र होगा तथा मंत्री भी शुक्र होगा अतः इस वर्ष में राजा और मंत्री दोनों के पद सुख के स्वामी शुक्र पर होने के कारण सुख के साधन बढेंगे अनाज का उत्पादन बढेगा तथा वर्ष में वृक्षों पर फलों की अधिकता रहेगी।लोगों में धार्मिक प्रवृति अधिक होगी अवं यज्ञ आदि अनुष्ठानों की वृद्धि होगी महिलाओं में नयी जाग्रति होगी एवेम नूतन समाज में महिलाओं की भागीदारी बढेगी । संवत्सर का फल :-  विश्ववासु नामक संवत्सर होनें के कारण समाज में अनेक बिमरियन फैलेंगी रोगों के चलते लोग अपना काम समय से पूरण नहीं कर पायेंगे ।शासकों की नीतियों का पुरजोर विरोध होगा एवं राज्नीति के चलते देश के पश्चमी भाग में ज्येष्ठ मास में  छत्र भंग होने की संभावना है.अनाज उत्पादन के बाद भी बाजार में महंगाई बढेगी चौपाय पशु गायें भैंस आदि महंगी होंगी तथा तिलहन एवं दलहन  के  भाव अत्यंत महंगे होंगे  । वर्षनाम ...

वैशनो तिथि -एकादशी

हिदू  दर्शन  सिधान्त  के  अनुसार  एकादशी का  विशेष  महेतुय माना गया  है । जीवन  के  किसी  भी  प्रकार  के  शंकट  को दूर करने  की  क्षमता  एकादशी का  व्रत  रखता  है  । इस  में  कोई  अतोसुक्ति नहीं  है ।एकादशी अध्यात्मक तिथि माना गया है । जो मानव  जीवन  के  प्रवाल शास्त्रू -कम , क्रोध . मद  . लोभ पर विजय  कराकर  जीवन  को  परमात्मा  के  निकटम  क्रपा  भजन  का  शरूप  प्रदान  करती  है । पुराण मतअनुसार अनेक  इसे  उद्धरण  है  जिस  में  स्पष्ट  वरन  है  की  एकादशी  के  ब्रतके  प्रभाव  से जीव  को  भगवन  की क्रपा  प्रदान  होती  है ।राजाअम्बरीश , पीतहामाह  भीसम  , धरम राज  युधिष्टर ,एवं  अर्जुन  को एकादशी  के प्रभाव से नारायण क्रपा  प्राप्त  हूई...

गणंत(मूल) लगन नक्षत्र विचार

गणंत(मूल) लगन नक्षत्र विचार  ज्योतिष में गणंत नक्षत्र लगन व राशि की चर्चा बड़े पैमाने पर प्राचीन काल से  की जाती रही है |अगर किसी जातक का जन्म मूल नक्षत्र में होता है तो उसे परिवार के लिए तथा सम्बन्धियों के लिया खराब माना जाता है |मूल नक्षत्र व लगन आदि का विचार ज्योतिष का अत्यंत प्राचीन मत है कहा जाता है की लंकापति रावाण नें  अपनें जयेष्ट पुत्र अहिरावान के मूल नक्षत्र में पैदा होनें के कारण पातळ में भिजवा दिया था तथा उसका मुंह तक नहीं देखा था |रामचरित मानस के मर्मग्य व रचियता गोस्वामी तुलसीदास का बचपन का नाम रामबोला था क्यूँ की जन्म ते ही इस जातक नें मुख से राम नाम का उच्चारण किया था |गोस्वामी जी का जन्म मूल नक्षत्र में होनें के कारण जन्म के कुछ दिनों बाद ही माता-पिता का स्वर्गवास हो गया था अतः मूल नक्षत्र व लगन निश्चय ही अनिष्ट करनें वाली होती हैं लेकिन इनमें जन्मे जातक निश्चय ही अत्यंत शक्तिशाली उद्ध्यम शील प्राकर्मी व इस संसार में यश प्राप्त करनें वाले होते हैं इसमें कोई अतिश्योक्ति नहीं है.| ज्योतिष अनुसार २७ नक्षत्रों में से ६ नक्षत्र मूल मने जाते हैं नम्बर -१ ,अश्वन...

bhawn ke andr kavad ka sthan

वास्तु कें अंदर घर कें जहा भोगोलिक व्यवस्थायो का  महत्व कें साथ  साथ वस्तुओ कें  रख  रखाव  का अपना  विशेष महत्व है | अगर आपका भवन  भोगोलिक सुवधयोसे  युक्त  है लेकिन देनिक वास्तु ओ  रख  रखाव ठीक  नहीं  है  तो भी वास्तु दोष  लग  जायेगा | इसी लिए ये  अति अबशक  है किकिसी  भवन  में  भोगोलिक  सुभदायोके  साथ  साथ वास्तु  ओ का रख  रखाव  भी  ठीक  हो अर्थात रशोई  घर  में  वर्तन ,तथा रशोई भंडार ,पहने जाने  कपडे ,घर या भवन  कें अंदर भंडार कीव्यवस्था अदि सभी  का अपना  महत्व है | भवन कें अंदर कबाड़ का स्थान -वास्तु अनुसार कबाड़ का स्थान दक्षिण  पक्शिम यानि नैरीत्य बाले कोने  को अनुकूल  मानाजाता  है |इस कोने में  राखी गयी  किसी वास्तु में  कोई उर्जा  पैदा  नहीं  होती  है |फलसरूप किसी  प्रकार की उर्जा न बननेके कारन नकारात्मक  प्रभाव  नहीं  पड़ता...

निरंतर ख़राब होगा मायावती जी का स्वाभिमान

निरंतर ख़राब होगा मायावती जी  का  स्वाभिमान उत्तर प्रदेश  की मुखिया मा ० मायाबती  जी  की जन्म  तिथि  प्राप्त  अभिलेखों  कें  अनुसार १५-जन-१९५६ तथा  समय २०.३४ जन्म स्थान दादरी [उ  प्र] है | दर्शाए गए अभीलेखो कें अनुसार मुख्यमंत्री जी  की कुंडली सिंह  लगन तथा मकर  राशी  की  बनती  है | जिस में  प्राप्त  नवांश मिथुन  राशी  से  बनता  है | मिथुन  राशी  जन्म  कुंडली  के  एकादश  भाव  में  तथा चन्द्र  कुंडली  कें छठे भाव  से  उत्पन्न  है |चन्द्र कुंडली के अनुसार मुख्य  मंत्री  जी  कुंडली में  शनि का गोचर इन के दशम  भाव  में  है तथा गुरु  का गोचर चौथे भाव  में  है |बर्तमान  समय  में मंगल गोचर चन्द्र  कुंडली  के  आठवे भाव  में  है | इस समय कुंडली कें अनुसार शनि १४-मार्च १९९४ से १४ मार्च -२०१३  तक  है |जिस म...

निरंतर बढेंगी नरेंद्र मोदी की समस्याएं .......................

निरंतर बढेंगी नरेंद्र मोदी  की समस्याएं ....................... ज्योतिष के अनुसार २८ अक्तूबर से मंगल काक गोचर परिवर्तन ; जो सूर्य की राशी सिंह में हुआ है .मोदी जी की छवि को ख़राब करें में सहायक सिद्ध होगा .१५ नवम्बर से बदला शनि का गोचर जो कन्या से तुला राशी में परिवर्तित हुआ है कुंडली में सादे साती का योग बनाता है फलस्वरूप भविष्य में राहत देने के आसार सिद्ध नहीं कर रहा है .अतः मंगल का गोचर मई २०१२ तक सिंह राशी में रहेगा मोदी जी की कुंडली तुला लगन तथा वृश्चक राशी में होने के कारण वर्तमान मंगल का गोचर उनकी कुंडली के १०वेइन घर जहाँ पैर शाक्नी और शुक्र स्थित हैं पर ग्रहण पैदा करेगा.फलस्वरूप मोदी जी की कार्यशैली पर प्रशन उठने लगेंगे .ज्योतिष में मंगल को बल का कारक माना गया है अतः मोदी राज्य के ऐसे मामले जिसमे बल या पुलिस का सम्बन्ध है.इनके दुरूपयोग के कारण छवि को समय समय पर धूमिल करते रहेंगे. दूसरी बात शनि का साढ़े साती का गोचर मोदी को मानसिक तनाव देगा. अन्य नई मुसीबतें अकस्मात ही पैदा करेगा फलस्वरूप राजनैतिक संकट पैदा होने की सम्भावना है. मई २०१२ के बाद जब गुरु राशी परिवर्त...