कालसर्प दोष जोतिषमै है मिथ्या पूरण

आधुनिक समयमै कल सर्प दोष के मधियम से जोतिष मै बढ़ी भिरान्तिसमाज मै बयाप्ता है

जिस के कारण जोतिष तथा जोतिशियो मै भिरान्ति पैदा कर रहा है
फलसरूप समाज को बढ़ी भिरंतियो का सामना करना पर रहा है अह एक बिद्म्व्ना की बात है
यधपि जोतिष सस्त्रो की बात कही जाये तो कालसर्प दोष की कही भी पुष्टिनहीं होती है
जबकि आधुनिक समय मै कल सर्प दोष पर चैनल मध्यम से प्रचार प्रसार चरम सीमा पर है
जब की इसकी पुष्टी जोतिष के किसी भी शात्र मैं नहीं हो ती है
यधपि जोतिष शास्त्रोनो मैं मानवी जीवन को प्रभावित क़र ने वाले अनके योग और दोष हैं जिनका वर्णन मिल ता है लकिन कालसर्प दोष नाम से जन्हा तक मेरा ख्याल है कोई दोष नहीं है जब की बाजार मैं जोतिषयो लिखी गयी पुस्त्नको के भंडार हैं अर्ध कल सर्प दोष तथा पूर्ण कालसर्प दोष थता उसकी शांति की बात समाज मैं आम हो गयी है प्रचार प्रसार के अधिकता के कारण जीविन मैं पीढ़ित लोग जोतिषयो के पास कालसर्प दोष की खूब ही चर्चा करने लगे हैं आधुनिक जोतिषयो के अनुसार जब किसी कुंडली मैं सभी ग्रहे राहू और केतु के प्रभाव मैं आ जा ते हैं
तब उसको कालसर्प दोष मन जा ता है तथा कोई एक ग्रहे एक इस्थिति से बहार हो ता है तो उसे अर्ध कालसर्प दोष कहिते ते हैं कहा जा ता है कालसर्प दोष के शांति कराये बीन सुख नहीं मिल ता है लकिन अगर हम वैदिक जोतिष और उसके परिणाम की बात करे तो इसकी पुष्टि कंही नहीं हो ती है मानवीय जीवन मैं होने वाली सभे घटना का आधार ग्रहे तथा नक्षत्र अवम इस से बन ने वाले सभी दोष तथा गुणों आधार पर होता है \जिस का समय निर्धारण दशायो दूयाराहोता है
मेरा मान ना यह नहीं है .कि जोतिष मै सत्य ता नहीं है या जोतिष मै सत्यता नहीं है .मै जोतिषी हू .तथा जोतिष को पूर्णविज्ञानं है |इस के परीणाम प्र्भाबी होते है इस मै मुझे कोई संदेय नहीं है
मै तो केबल उन सिधान्तो की बात कर रहा हू जिनका जोतिष मै कोई प्रमाण नहीं मिलते है
जो केवल समाज में जोतिष की मर्मज्ञता पर प्रश्न चिन्ह लगते है |अदापि जोतिष मै पार पाना बढ़ा मुस्किल है | जोतिषी को उसकी लगन तथा महनत के बल पर ही उसे देवज्ञ यानि देवता मानागया है | इस लिये इस की मर्यादा का धियानरखना अति आब सकय माना गया है |आधुनिक समाज में जोतिष समाज में भिरान्ति तथा अबिस्वास के लिए जोतिशियो की आग्यानता बहुत बढ़े पैमाने पर करक है | जिस से समाज को बढ़े पैमाने पर आ विस्वास पैदा है | अगर गोर किया जाये अपने सुयार्थ के चलते काफी हद तक दोषी है | लेकिन अधिक प्रमारकता जोतिशियोकी ज्ञान की अलाप्ग्यता है | जिस के चलते जोतिष भारत की प्राचीन तथा वैदिक विधा होने के वाद भी संदेह के घेरे मे है | जिस का मुझे काफी अफसोस है | यधपि मेरा मानना यह नहीं है की मै अपने विषय का पूर्ण ज्ञाता हू | लेकिन मेरा मानना यह अवश्स है कि जोतिष प्रेमियों के सयोग द्वारा समाज में जोतिष के पत्री पहले अविश्वाश कों दूर किया जा सकता है | हम सब को मिल कर इस ओर कदम बढ़ाने चाहिए यही सफलता का आधार है | आओ हम सब इस ओर प्रयास करे 

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