विवाह के पर्दे में देह व्यापार के ज्योतिषय आधार ज्योतिष के अनुसार कुंडली के सप्तम घर से जीवन साथी के गुण वैवाहिक जीवन की सफलता एवं असफलता तथा आपकी मैथुनिय शक्ति के बारे में आंकलन किया जाता है. इस के साथ साथ जीवन में सामजिक लोकप्रियता भी सातम घर पर ही निर्भर करती है ज्योतिष में शुक्र एवं गुरु दोनों को विवाह का कारक माना गया है अगर यह दोनों ग्रह किसी स्त्री पुरुष की कुंडली में कमजोर या पीड़ित भाव में हों या पाप प्रभाव में हों अथवा ग्रह युद्ध में हरे हुए हों या फिर वृश्चिक ,सिंह के नवांश में हों तो वैवाहिक जीवन में सफलता नहीं मिलती है दूसरी ओरचारित्रिक कमजोरी को लेकर अनेक प्रकार के लांछन जीवन में लगते रहते हैं . वैवाहिक जीवन की सफलता /असफलता का पूर्ण ज्ञान नवांश कुंडली द्वारा ज्ञात होता है अगर किसी कुंडली का नवांश उसके ६-८-१२ भाव में पढनें वाली राशियों से बन गया है तो विवाह होने में तथा वैवाहिक जीवन यापन करनें में कठिनायियन रहेंगी. अगर किसी कुंडली का नवांश कुंडली के एकादश भाव में पड्नें वाली राशी से हो ऐसी कुंडलियों में लाभ ,पद व् प्रलोभन ...
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ज्योतिष धर्म और अपवाद
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ज्योतिष धर्म और अपवाद ज्योतिष को वेदों का प्राण कहा जाता है | वैदिक मत के अनुसार ऐसा माना जाता है कि हमारे वेदों में एक लाख श्लोको में दस हजार श्लोक ज्योतिष के माने गाये है इसी लिए पुराणों ने ज्योतिष को वेदों की आंख माना है | ज्योतिष गणतीय पद्धति पर निर्भर होने के कारण इसका वैज्ञानिक आधार भी है | दुनिया में ज्योतिष एक ऐसा शास्त्र है भूतकाल वर्तमान तथा भविष्य की परमानिकता बतलाता है | क्योकि खगोलीय पिंड जिनका प्रथ्वी पर प्रथ्वी के जन जीवन पर गहरा असर पड़ता है | इसी लिए शास्त्रों में ...
खाप पंचायत : स्वगोत्र :वैवाहिक विवाद
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खाप पंचायत : स्वगोत्र :वैवाहिक विवाद हरियाणा राज्य से खाप पंचायत के माध्यम से जो आवाज़ उठी है कि स्वगोत्र में उत्पन्न युवक तथा युवती आपस में बहन और भाई होते है | ये मामला बिनाकिसी आधार के इतना तूल पकड गया की कानून बनाने बाले तथा सरकार चलने बाले राजनेता चाहे वह कोई मंत्री या मुख्य मंत्री है सभी वोटो की राजनीति को लेकर धर्म के ठेकेदार जो आये दिन खाप पंचयत के माध्यम से नित नई बाते उठाते रहते है | सभी उनका पक्ष करने लगे है तथा नई कानून की मांग करने लगे है | इतना ही...
वास्तु दोष युक्त है बसेमेंट का निर्माण
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आधुनिक समय में बेसमेंट का प्रचलन दिनों दिन बढ रहा है | बेसमेंट धरातल से निचे की स्थति में स्थित होने के कारण दोष युक्त माना जाता है | धरातल से नीचा होने के कारण अनकूल वायु , तथा प्रकाश दोनों की भरी मात्र में कमी होती है | जिस से सरीर में अनकूल उर्जा की भरी कमी हो जाती है | अर्थात स्वस्थ पर बिपरीत प्रभाव परता है | बेसमेंट में रहने, खाना खाने , तथा सोने से. स्वस्थ पर बिपरीत प्रभाव पड़ता है | इस के साथ साथ धरातल से अधीक उचा या अधीक नीचा रहने की बिधा भोगालिक अनकू...
स्वगोत्र :खाप पंचायत : विवाह
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स्वगोत्र :खाप पंचायत : विवाह विवाद भागवत पुराण के अनुसार ब्रह्मा के बाएँ अंग से महिला की उत्पत्ति हुई और दायिने अंग से पुरुष की उतपत्ति हुई अर्थात स्त्री और पुरुष एक ही शारीर के दो अभिन्न अंग है जिनके कारण सृष्टि का सृजन हुआ और चलता आ रहा है जहाँ तक गोत्र का निर्धारण है हिन्दू समाज में उसकी दो प्रकार से व्यवस्था है पहली पिता के द्वारा दूसरी गुरु के द्वारा/पति के द्वारा .इसके साथ साथ किसी भी महिला को अपने जीवन साथी चुनने की गुण,वंश और बल के आधार परदी गयी है. जिस से प्रभावित हो कर कोई स्त्री अपने जीवन की रक्षा एवं व्यवस्था का भार किसी पुरुष को सोंपती है या उसके माता पिता कन्यादान के माध्यम से करते हैं इसके बाद कन्या का नाम गोत्र व जाति पति की सुविधा अनुसार हो होती है. हिन्दू समाज में कुछ लोग क्षत्र वाद को मान्यता देते हैं ,कुछ वंश वाद को देते हैं कुछ गोत्र वाद को देते हैं अर्थात अपनी नानी मामी आदि के गोत्र में विवाह करना वर्जित मानते हैं,कुछ लोग एक ही गोत्र में विवाह को ठीक मानते हैं लेकिन क्षेत्रीय अन्तेर को अनिवार्य मानते हैं एवं कुछ दुसरे लोग बुआ,विवाहित बहन के गोत्र ...
कंहा लगाय कोन सा पौधा घर के अंदर
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वृक्ष इस धरा का आभूषण है | वृक्ष धरा का देवता है | सभी विकारोको अपने उपर ग्रहण कर मानब जीवन में सुख तथा सन्ति देने बाला वृक्ष ही मना गया है | महाभारत काव्य के राचीय्ता वेद व्यास जी ने अपने महाभारत पुराणमें लिखा है किवृक्ष श्राष्टी के अलंकार है तथा मानब जीवन के देवता भी है | वृक्ष कटना महा पाप है तथा वृक्ष रोपण महा पुण्य है इतना ही नही वेद व्यास जी ने महा भारत में लिखा कि वृक्ष रोपण पुत्र के समान सुभ फळ दायी है जीन के जीवन में संतान नही है ऐसे दाम्पत्ती वृक्ष रोपण कर के पु...
ग्रह दशा :३१ अक्टूबर १९८४:१८से १९ मई २०१०
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ग्रह दशा :३१ अक्टूबर १९८४:१८से १९ मई २०१० ३१ अक्टूबर १९८४ की ग्रेह स्थति पर ज्योतिषिये आधार पर अगर विवेचन करें तो ग्रहों की स्थिति कुछ इस प्रकार की बनती है जो मानव जीवन को अत्यंत प्रभावित करने वाली तथा देश के लिए दुर्भागयापुरण सिद्ध हुई .उस समय की ग्रह स्थिति जिसका आंकलन स्वतंत्र भारत की कुंडली में किया जाये तो देश के लिए कमजोर और भयानक परिस्थिति थी जिसका आरम्भ किसी राजनेता के भाषण या धर्म आधार को माना जाये.,तो ज्योतिषीय स्थिति स्पष्ट हो जाती है.स्वतंत्र भारत की कुंडली वृषलगन और कर्क राशी की है जिसका नवांश मीन राशी से बनता है. उस समय कुंडली में सूर्य में केतु का अंतर चल रहा था.केतु भारत की कुंडली में सप्तम घर ,मारक स्थान में है ३१ अक्टोबर वाले दिन कानून का कारक गुरु मंगल के साथ १२ वें घर वानप्रस्थ अवस्था में था. फलस्वरूप जो घटना घटित हुई उस पर कानून और सेना ने नियंत्रण हेतु कोई कार्य नहीं किया घटना स्थलों से सेनाओं की दुरिएअन होने के कारण घटना घटित होती रही . इस घटना का एक दूसरा ज्योतिषीय कारण शक्तिशाली सूर्य जो सरकार वा सत्ता का का...