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रक्षाबंधन

रक्षाबंधन रक्षाबंधन हिंदुओं का सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है. यह त्यौहार भाई और बहन के बीच अटूट प्रेम संकेत. यह त्यौहार सा व न हिंदु माह के पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है. इस वर्ष 2009 में, यह 5 अगस्त को मनाया जाएगा. शब्द "रक्षाबंधन" आत्मीय और भौतिक सुरक्षा के के लिए खड़ा है. यही कारण है कि जब एक बहन के संबंधों को राखी गाँठ, वह कहते हैं, "भाई! मैं तुम्हारे पास आई हूँ, आप मेरी सभी बुराइयों से रक्षा करोगे ." इस शुभ दिन पर, बहन अपने भाइयों की कलाई पर एक पवित्र बैंड राखी बाँध कर मिठाई खिलाती है . बदले में, अपने भाई बहनों के विभिन्न उपहार देते हैं. यह दंत कथा पुरातन काल से कही जा रही है कि द्रौपदी , पांडवों कि पत्नी और राजा द्रुपद की बेटी थी , एक बार जब कृष्णा su दर्शन chakr से 'हाथ ओं घायल हो गया और वह बुरी तरह से खून बहने लगा. द्रौपदी देखा जिस क्षण, वह उसकी साड़ी का एक कोना फाड़ और कृष्णा 'हाथ नों पर लिपटे. पौराणिक कथाओं कि कृष्णा जब Duhshasana उसे नंगा करना करने की कोशिश की कि कर्ज चुकाने के ल...

दीपावली पर करें कन्या पूजन

दीपावली पर करें कन्या पूजन  वैसे तो हिन्दुओं के प्रतेयक पर्व पर सिध्ही बुध्ही के स्वामी गणेश तथा आदि शक्ति माँ भगवती कीउपासना का अति प्राचीन विधान है. जिसके फल स्वरुप जब तक आदि शक्ति माँ भगवती की कृपा न हो तब तक जीवन से सुख ओर शांति एवं सफलता कोसों दूर रहती है . इस सृष्टि में महामाया देवी की शक्ति के दो रूप हैं अद्रिशय व दृश्य देवी के अद्रिशय स्वरुप को मेधा के नाम से जाना जता है. जो इस संसार को सम्मोहित करने,भ्रमित करनें एवं भावः जंजाल में फसनें का काम करती है. जो ईश्वरीय इच्छा पर चलती रहती है. दूसरी शक्ति जो दृश्य है वह सांसारिक संबंधों को नारी के रूप में स्थापित करती है. जिसके संसार में अनेक रूप बहन, बेटी, माता व भार्या के रूप में है. जो इस संसार में पुरुष के साथ शक्ति संचार हेतु कंधे से कंधा मिला केर इस सृष्टि के कार्यों को करती है. पर्त्येक मानव की इस संसार से चार प्रकार की उपेक्षा प्राचीन काल से ही मानी गयी है. जिनको धरम, अर्थ,काम ओर मोक्ष के नाम से जाना जाता है .इन चारों अवस्थाओं में आदि शक्ति देवी का नारी के रूप में संलगन होना मानवीय सफलता के लिए अत्यंत आवश्येक है वेदों ओं...

गजेन्द्र मोक्ष स्त्रोत्र : मूल पाठ

गजेन्द्र मोक्ष स्त्रोत्र : मूल पाठ विश्व की उत्पत्ति का कारण हरि जो स्वयं बने, सत चित और आनंद के रस से सने ॥ दूर करते तीन ताप को कृपा मय द्रष्ट से । नमन है श्री क्रष्ण को सुख दे हमें निज द्रष्ट से।। इस सम्पुरण संसार की रचना इश्वर की इच्छा पर ही हुई है वाही सृष्टि की उत्पत्ति संघार और पालन के कार्य और कारण है जिन का स्वरुप सत्य चित और आनंद से परिपूरण है। जिनकी कृपा मय दृष्टि दैविक ,दैहिक और भौतिक सभी प्रकार के कष्टों कोप दूर करने वाली है। ऐसे परमात्मा भगवान् श्री क्रष्ण को हमारा नमन है। निवेदन है कि अपनी कृपा मय दृष्टि सुख और आनंद दें। गज ग्रेह

गजेन्द्र के पूर्व जन्म संस्कार

गजेन्द्र के पूर्व जन्म संस्कार लोक शिक्षा के लिए अवतार था ,जिस ने लिया। जन अदृशय हो कर के भी , जन स्दृशय को कौतिक किया ॥ राम नाम ,नाम जिसका सर्व मंगल धाम है । नमन है श्री कृष्ण को ,श्रद्घा में प्रणाम है ॥ भगवान् श्री हरि के दर्शन पा कर ग्रह श्री हरि के समान रूप बना कर सभी देवताओं के देखते देखते देव लोक को चला गया तथा गजेन्द्र भी अपने हाथी की योनी को छोड़ कर श्री हरि के समान रूप वाला होकर वैकुण्ठ धाम को गया। इस रहस्य के पीछे भगवत महा पुराण में गज और ग्रह दोनों के पूर्व जन्म संकार की कथा मिलती है जिस से यह सिद्ध होता है कि सृष्टि का प्रत्येक जीव अपने पूर्व जन्म के कर्मों के अनुसार ही सुख और दुःख भोगता है। सुखदेव जी ने अर्जुन पौत्र परीक्षत को समझाते हुए उनके पूर्व जनम कि कथा का वर्णन इस प्रकार किया कि गज पूर्व जन्म में पांडव कुल में उत्पन्न इन्देर्धुमन नाम का राजा था जो प्रजा पालन में कुशल वैष्णो का चरण अनुरागी था कालांतर में उसने इस आशय से राज पाठ स्त्री और पुत्र सभी का त्याग कर दिया कि वह प्रभु भक्ति कर अपने जीवन को सफल और सुखद बनाएगा फलस्वरूप इन्देर्धुमन जंगल में जा कर प्रभु चरणों...

गजेन्द्र मोक्ष स्त्रोत्र

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गजेन्द्र मोक्ष स्त्रोत्र गजेन्द्र मोक्ष की पौराणिक कथा महारिशी वेड व्यास द्बारा रचित भगवत महापुराण जिसे सुख सागर के नाम से जाना जाता है के पूर्वार्ध में मिलती है। पौराणिक मत के अनुसार अष्टम मान व्येंत्र में हु हु नाम का एक ग्रह मानसरोवर के जल में रहता था जो अत्यन्त बल शाली था। मानसरोवर में हाथिओं के राजा गजेन्द्र जो अपने बल और विवेक के लिए प्रसिद्ध था का संध्या के समय परिवार के साथ जन आना हो गया गज अपनी पत्नी के साथ मानसरोवर में नित्य प्रति जल क्रीडा करता था तथा अपने बचों के साथ भी खेलता था। एक लंबे समय के बाद सरोवर में रह रहे हु हु नाम के ग्रह से गज का बैर हो गया। एक दिन जब गज अपने परिवार के साथ जल क्रीडा करने हेतु मानसरोवर गया हुआ था जल क्रीडा के समय ग्रह ने उसका पैर पकड़ लिया फलस्वरूप दोनों में युद्ध शुरू हो गया गज अपने पैर को छुडाने के लिए भरपूर बल का प्रयोग करने लगा लेकिन जल के अंदर.ग्रह का बल अधिक होने के कारण वो गज को खीनता ही चला गया .यह युद्ध लगातार ६ महीने चलता रहा गज का बल दिन प्रतिदिन कम होता गया ग्रह का बल बढता गया एक दिन निराश मन से उस गज को उसकी पत्नी और बच्चों ने भी छोड़...

स्वेत आर्क के वास्तु गणेश

स्वेत आर्क के वास्तु गणेश वास्तुशास्त्र में हिंदू दर्शन के अनुसार गणेश की प्रतिमा तथा पूजन का आवासीय शुद्धि एवं अनुकूल ऊर्जा के लिए विशेष महत्तव है इसलिये सभी प्रकार के वास्तु दोषों को दूर करने हेतु दोष्वाले स्थान पर वास्तु गणेश लगाने का विशेष प्राचीन विधान है। वैसे तो वास्तु गणेश अनेक प्रकार की धातुओं के बनाये जाते हैं जिन में सभी के अपने अलग अलग प्रभाव हैं.लेकिन स्वेत आर्क का वास्तु गणेश सभी प्रकार के दोषों को मुक्ति हेतु सबसे सरल साधन तथा मनोकामना सिद्ध करनेवाला कहा जाता है। स्वेत आर्क एक ऐसा पौधा होता है जिसको हिंदू दर्शन के अनुसार साक्षात् ही गणेश का रूप कहा जाता है इस पौधे के अंतर्गत अनेक औश्धिये एवं दैविक गुण होने के साथ साथ एक विशेष यह भी गुण है कि इसकी जड़ में स्वयं गणेश जी कि आकृति बनी होती है। अगर जड़ को ध्यान से देखा जाए तो इसके बराबर में निकली दो शाखाएँ गणेश जी के दो दातों का कार्य करती हैं एवं इस से आगे का भाग साक्षात् गणेश जी का रूप बना देता है। इस लिए इस पौधे के पूजन तथा प्रतिमा का विशेष महत्त्व है। प्रतिमा के आभाव में इसकी लकड़ी एवं पुष्प पत्ते सभी भवन को वास्तु दो...

सभी प्रकार के वास्तु दोषों को दूर करते है सिद्धिदाता गणेश

सभी प्रकार के वास्तु दोषों को दूर करते है सिद्धिदाता गणेश भगवन श्री गणेश जी को प्र्थ्मेश्वर विघन हरने वाले सिद्धेश्वर के नाम से जाना जता है। कहा जता है की गणेश उपासना से मानसिक शान्ति के साथ साथ सुख व समृद्धि मिलती है। हिंदू दर्शन के साथ साथ गणेश जी के बारे में जैन धर्म में भी इनकी पूजा तथा प्रर्तिमायें मिली हैं जैन धर्म के अनुसार भगवन गणेश जी को गणेश्वर विनायक के नाम से जाना जाता है जिसका उल्लेख १६वी सदी से १८वी सदी के श्वेताम्बर जैन कवियों की हिन्दी एवं राजस्थानी भाषाओँ में मिलता है। इसके अलावा बौधों ने भी अपने धर्म के प्रचार के साथ साथ हिंदू धर्म के देवता श्री गणेश एवं अन्य देवी देवताओं को कुछ अन्तर के बाद ज्यों का त्यों मान लिया है। जिसका उल्लेख नेपाली बौध साहित्य के प्रमुख ग्रन्थ गणपति ह्रदय में मिलता है। जो बौधों की सभी कामना सिद्ध करने वाला ग्रन्थ है। इस ग्रन्थ का प्रत्येक मन्त्र - ॐ नमस्तुते गणपतये स्वाहा ,ॐ गणपतये स्वः से प्रारम्भ होता है। भगवान् श्री गणपति जी के जन्म के बारे में हिंदू दर्शन में उल्लेख मिलता है। जिसके अनुसार धर्म तत्व स्थूल के साथ साथ सूक्ष्म बन कर ब...