दीपावली पर वास्तुशास्त्र अनुसार करनें योग्य उपाय

दीपावली पर वास्तुशास्त्र अनुसार करनें योग्य उपाय

दीपावली ज्ञान और समृद्धि का पर्व है. माना जाता है की इस दिन शुरू किया गया कोई कार्य एक लम्बे समय तक निर्विघन चलता है तथा सफल होता है .मनुष्य के चहु मुखी विकास के लिए विवेक,धन और ईश्वरीय कृपा की आवश्यकता पड़ती है जो दीपावली पर भगवान् गणेश ,लक्ष्मी तथा पालनहार विष्णु की कृपा से प्राप्त होती है. यह माना जाता है की दीवाली वाली रात अर्ध रात्रि से धन की देवी लक्ष्मी अपनें पति भगवान् विष्णु के साथ पृथ्वी पर भ्रमण करती है तथा अपने जन्म उत्सव देखती है .उनके भ्रमण के समय जिस घर के द्वारेखुले मिलते हैं ,ज्योतिर्मय मिलते हैं या फिर उस समय जिस घर में उनकी पूजा हो रही होती है उन सभी घरों में अपनें पति के साथ लक्ष्मी चिर काल के लिए निवास करती है. लक्ष्मी और लक्ष्मी नारायण की प्रसन्नता हेतु वास्तु विदों नें कुछ उपाय इस प्रकार बतलाये हैं
१) दिवाली वाले दिन साधक को प्रातः काल शांत भाव से उत्तार दिशा   की तरफ मुह क़र के  बैठ लक्ष्मी वा लक्ष्मी नारायण का ध्यान करना चाहिए .
२)पारिवारिक वृद्ध जानो से आशीर्वाद ग्रहण क़र घर की सफाई करनी चाहिए तथा घर के प्रांगन को लक्ष्मी आगमन हेतु मेहमान नवाजी के लिए सजाना चाहिए.
३)लक्मी के स्वरुप में माने जाने वाली कन्या ,गाय आदि की सेवा शांत भाव से करनी चाहिए.कुल की समृद्धि हेतु  देव स्थान वा तीढ़ स्तनों में दीप दान करना चाहिए.
४)लक्ष्मी पूजन से पहले घर के द्वारे और फर्श आदि को गंगा जल या गुलाब जल से साफ़ करना चाहिए. देहलीज से बाहर दीप दान करें .घर के सभी द्वारों को धार्मिक सुंदर आकृति से सजाना चाहिए.
५) दीपावली पूजन धनतेरस से भैयादूज तक माना जाता है तीन दिन तक पूजन का विशेष विधान कहा गया है. जो धन तेरस से लेकर दीपावली तक तथा दीपावली से भय दूज तक माना जाता है ,अगर सुविधा हो तो ३ दिन पूजन करा के श्रीसूक्त से या कनकधारा स्त्रोत्र से देवी का आवाहन करना चाहिए .
६) लक्ष्मी पूजन में एक अक्शिये नारियल तथा दक्षिणा मुखी शंख से श्री यंत्र एवं स्फिटक और चंडी की मूर्ति की पूजा विशेष शुभ मानी जाती है ऐसा करनें से साधक परिवार का चहुमुखी विकास होता है
७)तिजोरी पूजन के बाद रोकर  आदि रखनें  से पहले तिजोरी में हल्दी और नामक २-२ चुटकी रखना चाहिए वास्तु अनुसार हल्दी गुरु ग्रह वा नामक मंगल ग्रह के कारक हैं.जो सुख समृद्धि हेतु धन वृद्धि के कारक मानें गये हैं.
८)तिजोरी में भूल क़र भी कागज़ विसिटिंग कार्ड या अन्य अनावश्यक  सामान नहीं होना चाहिए.ऐसा करनें से धन खर्च की गति बडती है तथा धन की  देवी लक्ष्मी का अपमान होता है.
९) लक्ष्मी की प्रसंन्त्ता एवं परिवार के चहु मुखी विकास हेतु ये आवश्यक है की वो अपनें जीवन में शांति से जिए तथा नैतिक मूल्यों की रक्षा करे,धर्मानुसार आचरण करे.
10) धैर्यवान चारित्रिक बल वाले व्यक्ति जब कार्य करते हैं तो लक्ष्मी स्वयं ही चिर काल के लिए उनके भाग्य को सहारा देने हेतु घर में निवास करती है अतः सही समय अनुसार उद्धम करनें से लक्ष्मी स्थिर निवास करती है तथा व्यक्ति धनाडय होता है ना की धन के पीछे भागने से. .

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